यहां मय्यत पर डांस करती हैं बार बालाएं

मान्यता है कि इस मरघट में चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। यहां बार बालाएं मोक्ष के लिए नाचती रहती है।

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जयपुर। भारत एक ऐसा समदंर है जहां पर कई धर्मों की नदियां आकर मिलती हैं। यहां पर अलग-अलग मान्यताएं और परम्पराएं मौजूद हैं। धार्मिक स्थलों में लोगो का अटूट यकीन है। भगवान के प्रति विश्वास इतना गहरा है कि वह किसी भी नास्तिक को हैरान कर देता है। काशी का मणिकर्णिका श्मशान घाट इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

मान्यता है कि इस मरघट में चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। संसार का यह इकलौता ऐसा श्मशान घाट है, जहां पर चिता की ज्वाला कभी ठंडी नहीं होती है। यहां लाशों का आना और चिता का जलना कभी नहीं ठहरता है।

मणिकर्णिका घाट पर एक दिन में करीबन 200 से 300 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। माना जाता है कि जिस दिन इस घाट पर जिस रोज चिता नहीं जली वह बनारस के लिए प्रलय का दिन होगा। पर्यटक भी इस अनोखे नजारे को देखने के लिए यहां आते हैं। चिता जलाने की क्रिया काफी अनोखी और आकर्षक होती है।

इतना ही नहीं यहां पर जलती चिताओं के बीच चिता भस्म से होली भी खेली जाती है। साथ ही सबसे अनोखी चीजा यहां पर चैत्र नवरात्री अष्टमी को जलती चिताओं के बीच मोक्ष की उम्मीद में शहर की बार बालाएं रात भर नाचती है। यानी शहर की जितनी भी वेश्याएं होती हैं, वो यहां पर उस रात को नाचती हैं। उन्हें यकीन है कि अगर इस एक रात ये जी भरके यूं ही नाचेंगी तो फिर अगले जन्म में इन्हें नगरवधू का कलंक नहीं झेलना पड़ेगा।

इनके लिए जीते जी मोक्ष पाने की मोहलत बस यही एक रात देती है। साल में एक बार ये मौका आता है चैत्र नवरात्र के आठवें दिन. और इस दिन श्मशान के बगल में मौजूद शिव मंदिर में शहर की तमाम नगरवधुएं इकट्ठा होती हैं और फिर भगवान के सामने जी भरके नाचती है।

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