जिस दिन अपने जरूरतों के हिसाब से जीने लग गए, उसी दिन से आपकी जिंदगी में खुशियों की शुरूआत होगी।  

आदमी रह बोझ से हल्का हो सकता है पर ख्वाहिशों का बोझ व्यक्ति को कभी हल्का नही होने देता हैं। ये हमेशा ही बढ़ता है और यही असंतोष व दुख का कारण हैं।

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आदमी रह बोझ से हल्का हो सकता है पर ख्वाहिशों का बोझ व्यक्ति को कभी हल्का नही होने देता हैं। ये हमेशा ही बढ़ता है और यही असंतोष व दुख का कारण हैं। जिस दिन आप अपने जरूरतों के हिसाब से जीने लग गए उसी दिन से आपकी जिंदगी में खुशियों की शुरूआत होगी। जिसमें सब्र है वो ही सुखी हैं। वरना तो सब और दुख ही दुख हैं, यारों जिंदगी को संभालो, वरना खुद इसके तले दबकर रह जाओगे।

कुछ तो ख्याल करो ,यारो जिन्दगी का

कहा कब मिलेगी, ये दोबारा

आज को आंनद से जी लो

कुछ सपनो के बदले

अपनो को मत खो देना

सीमित सपनों की कहानी

खुशियों तक जाती हैं।

हमेशा अपने आज में जिओगे तो ही अपने हिस्से की खुशियां पाओगे। वरना सब कुछ खो कर रोने के अलावा कुछ नही बचेगा। जीवन में आप जितना खो देते हो तो उससे ज्यादा पा सकते हो।

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