दुनिया की सबसे रहस्यमयी किताब जो अभी तक किसी ने नहीं पढ़ी है

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जयपुर, इतिहासकारों के अनुसार, यह रहस्यमयी किताब 600 साल पुरानी है। कार्बन डेटिंग से पता चलता है कि यह 15 वीं शताब्दी में लिखा गया था। पुस्तक हस्तलिखित है, लेकिन कोई भी नहीं समझता है कि क्या लिखा गया है और किस भाषा में है। यह किताब एक अनसुलझी पहेली की तरह है। इसे ‘वॉयनिक पांडुलिपि’ नाम दिया गया है। पुस्तक में मनुष्यों से लेकर पौधों तक के कई चित्र शामिल हैं, लेकिन इनमें से सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि इस पुस्तक में पेड़ों और झाड़ियों के कुछ चित्र शामिल हैं, जो पृथ्वी के किसी भी पेड़ पौधे से मेल नहीं खाते हैं। कहा जाता है कि इस रहस्यमयी किताब में कई पेज थे, लेकिन समय के साथ इसके कई पेज बिगड़ गए। वर्तमान में इसके केवल 240 पृष्ठ शेष हैं। इस पुस्तक के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। लेकिन यह ज्ञात है कि पुस्तक में लिखे गए कुछ शब्द लैटिन और जर्मन भाषा में हैं। अब वह रहस्य क्या है, केवल पुस्तक लिखने वाले को ही पता है कि यह पुस्तक भविष्य में पढ़ी जाएगी। माना जाता है कि लाल किताब के ज्ञान को सबसे पहले अरुणदेव ने खोजा था जिसे अरुण संहिता कहा जाता है। फिर इस ज्ञान को रावण ने खोजा और इसके बारे में रावण ने लिखा था। फिर यह ज्ञान खो गया, लेकिन यह ज्ञान लोकपरंपराओं में जीवित रहा। कहते हैं कि आकाश से आकाशवाणी होती थी कि ऐसा करो तो जीवन में खुशहाली होगी। बुरा करोगे तो तुम्हारे लिए सजा तैयार करके रख दी गई है। हमने तुम्हारा सब कुछ अगला-पिछला हिसाब करके रखा है।

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